जब सौमित्र चटर्जी ने राष्ट्रीय पुरस्कार लेने से किया इनकार, ये थी वजह

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नई दिल्लीः सौमित्र चटर्जी (Soumitra Chatterjee) एक ऐसे कलाकार थे, जिन्होंने देश, भाषा की सीमाएं लांघ कर सत्यजीत रे की सिनेमाई दृष्टि को बड़ी कुशलता से अभिव्यक्ति प्रदान की थी. हालांकि, उनकी सिनेमाई शख्सीयत काफी विशाल थी. वह सिर्फ बंगाली सिनेमा के सितारे बन कर नहीं रहे.

जब पुरस्कार लेने से किया इनकार
सौमित्र चटर्जी ने दो बार पद्मश्री पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया था. साल 2001 में उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार लेने से भी मना कर दिया था. उन्होंने जूरी के रुख के विरोध में यह कदम उठाया था.

हालांकि, बाद में उन्हें 2004 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया और 2006 में उन्होंने ‘पोड्डोखेप’ के लिये राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता. 2012 में उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें 2018 में फ्रांस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘लीजन डी ऑनर’ से भी सम्मानित किया गया. इससे अलावा भी वह कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हुए.

विश्व सिनेमा से परिचय
सौमित्र चटर्जी ने अपनी पहली फिल्म ‘अपुर संसार’ से दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी थी. फिल्म में उन्होंने अपु का रोल निभाया था. दर्शकों को उनका दाढ़ी वाला लुक काफी भाया था. ऐसा कहा जाता है कि यह रे को युवा टैगोर की याद दिलाता था.

1959 में आई इस फिल्म के साथ रे की प्रसिद्ध अपु तिकड़ी पूरी हुई थी और इससे विश्व सिनेमा से चटर्जी का परिचय हुआ. आने वाले दशकों में चटर्जी ने फिल्मों और थियेटर में कई तरह के किरदार निभाए और कविता व नाटक भी लिखे.

सौमित्र के शिक्षक थे सत्यजीत रे
सत्यजीत रे के पसंदीदा अभिनेता ने उनकी ‘देवी’ (1960), ‘अभिजन’ (1962), ‘अर्यनेर दिन रात्रि’ (1970), ‘घरे बायरे’ (1984) और ‘सखा प्रसखा’ (1990) जैसी फिल्मों में काम किया. दोनों का करीब तीन दशक का साथ 1992 में रे के निधन के साथ छूटा.

चटर्जी ने सत्यजीत रे की 14 फिल्मों समेत 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था. उन्होंने समानांतर सिनेमा के साथ-साथ कमर्शियल फिल्मों में भी खुद को बखूबी ढाला था. चटर्जी ने सत्यजीत रे के बारे में एक बार कहा था, ‘…उनका मुझ पर काफी प्रभाव था. मैं कहूंगा कि वह मेरे शिक्षक थे. अगर वह वहां नहीं होते तो मैं यहां नहीं होता.’ उन्होंने मृणाल सेन, तपन सिन्हा और तरुण मजूमदार जैसे दिग्गजों के साथ भी काम किया.

दादा और पिता ने कराया था अभिनय से पिरचय
सौमित्र चटर्जी का जन्म कलकत्ता (अब कोलकाता) में 1935 में हुआ था. चटर्जी के शुरुआती वर्ष नादिया जिले के कृष्णानगर में बीते थे, जहां से उन्होंने स्कूली शिक्षा प्राप्त की थी.
सौमित्र का अभिनय की दुनिया से पहली बार परिचय उनके दादा और वकील पिता ने कराया था. वह दोनों भी कलाकार थे. 

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बॉलीवुड का नहीं किया कभी रुख
बॉलीवुड से कई ऑफर के बावजूद उन्होंने कभी वहां का रुख नहीं किया, क्योंकि उनका मानना था कि इससे साहित्यिक कामों के लिये उनकी आजादी खत्म हो जाएगी. योग के शौकीन चटर्जी ने दो दशकों से भी ज्यादा समय तक एकसान पत्रिका का संपादन भी किया था.

बता दें कि फिल्मी जगत का यह सितारा आज इस दुनिया से रुखसत हो गया है. उन्हें कोविड-19 से पीड़ित होने के बाद छह अक्टूबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वह कई अन्य बीमारियों से भी पीड़ित थे.

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